यज्ञ कर्म मे पत्नी का स्थान
प्रश्न है , यज्ञ कर्म में पत्नी का आसन प्रायः पति के दाहिनी और होता है , परन्तु गर्भाधान , नामकरण , और निष्क्रमण संस्कारों में पत्नी का स्थान पति के बायीं ओर क्यों होता है।
आपको सादर नमस्ते
संस्कारों में सर्वत्र सर्वेषु धर्म कार्येषु पत्नी दक्षितो भवेत् । सभी धर्म कार्यों में पत्नी का सदैव दक्षिण स्थान ही मान्य है जिस की प्रधानता होती है वह संस्कार उसी पर निर्भर होता है गर्भाधान निष्क्रमण नामकरण इन तीनों संस्कारों में संतान की प्रधानता है इसलिए पत्नी संतान के साथ वाम भाग मैं बैठती है संतान के निमित्त पिता द्वारा जो कार्य किया जाता है वह दक्षिण भाग में बैठकर ही किया जा सकता है इसलिए पत्नी पुत्र के साथ बाम भाग में बैठती है यहां प्रधानता संतान की है पत्नी की नहीं
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